मनोरंजन जगत आज जिस घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, वो हो गई है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कुछ देर पहले ही इस बात की आधिकारिक घोषणा की है कि असम भाषा में बनी ‘विलेज रॉकस्टार’ भारत की तरफ से ऑस्कर में आधिकारिक हिस्सा लेगी। अब ‘विलेज रॉकस्टार’ 91वें एकेडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करती नजर आएगी।

इंडियन एक्सप्रेस की से बात करते हुए जूरी मेम्बर अनंत महादेवन ने बताया है कि, ‘विलेज रॉकस्टार इस साल की सबसे बेहतरीन भारतीय फिल्म है जो सभी इंटरनेशनल मापदंडों पर खरी उतरती है। हमें गर्व है कि हमने इस फिल्म को ऑस्कर के लिए चुना है।’

क्या है फिल्म की कहानी:

फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ की कहानी एक गांव में रहने वाले ऐसे बच्चों की है जो गरीबी में भी खुशी-खुशी अपनी जिंदगी जीते हैं। हजारों परेशानियों का सामना करने के बावजूद भी ये बच्चे ख्वाब देखने से नहीं डरते हैं। इन्हीं गरीब बच्चों में से एक लड़की का सपना है कि कभी उसका खुद का गिटार होगा। फिल्म इसी बच्ची की कहानी को खूबसूरती से पर्दे पर पेश करती है।

65वें नेशनल अवॉर्ड्स में भी बचा चुकी है ढंका:

असम भाषा में बनी ‘विलेज रॉकस्टार’ ऑस्कर 2019 के लिए सलेक्ट होने से पहले 65वें राष्ट्रीय पुरस्कारों में भी अपना ढंका बचा चुकी है। जूरी ने इसे इस साल की सबसे बेहतरीन फीचर फिल्म के पुरस्कार से नवाजा था। राष्ट्रीय पुरस्कारों में इसे बेस्ट फिल्म के साथ-साथ बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट, बेस्ट लोकेशन साउंड रिकॉर्डिस्ट और बेस्ट एडिटिंग का पुरस्कार भी मिला था।

बता दें अब तक भारत की तरफ से भेजी गई केवल तीन ही फिल्में फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में जगह बना पायी हैं। इनमें महबूब खान की ‘मदर इंडिया’ (1957), मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्बे’ (1988) और आशुतोष गोवारिकर की ‘लगान’ (2001) के नाम शामिल हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि ‘विलेज रॉक्स्टार’ ऑस्कर 2019 की फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी अपनी जगह बनाएगी और पुरस्कार जीतकर ही भारत लौटेगी।

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